विद्यालय का संछिप्त इतिहास ( विकास यात्रा )

मुरारी इंटर कॉलेज, सहजनवां, गोरखपुर की स्थापना गोरखपुर जनपद के महान शिक्षा प्रेमी राय बहादुर मकसूदन दास ने अपने ज्येष्ठ भ्राता स्वर्गीय मुरारी लाल के नाम पर सन 1934 ई. में मुरारी हायर सेकेंडरी स्कूल, सहजनवां के नाम से की थी | यही ‘मुरारी हायर सेकेंडरी स्कूल, वर्ष 1948-49 में हाई स्कूल साहित्यिक वर्ग की मान्यता प्राप्त कर मुरारी इंटर कॉलेज सहजनवां-गोरखपुर के नाम से प्रतिष्ठापित हुआ जो आज क्षेत्र के ज्ञानपियासु , बालक बालिकाओं को शिक्षा देने में अनवरत सन्नद्ध हैं |विद्यालय के संस्थापक प्रधानाचार्य स्वर्गीय राज मंगल चौबे की कर्तव्यपरायणता एवं अनुशासनप्रियता तथा प्रबंधक समिति की सहायता से विद्यालय 1951 – 52 में विज्ञानं एवं वाणिज्य वर्ग, 1957 –58 में इंटर वाणिज्य वर्ग, 1960 – 61 में इंटर विज्ञानं (गणित ) वर्ग तथा 1963 – 64 में इंटर जीव विज्ञानं की मान्यता प्राप्त कर दिन दूनी, रात चौगुनी गति से प्रगति कर क्षेत्र ही नहीं, जनपद में भी शिक्षा की मिशाल कायम किये हुए है | विद्यालय के कुशल सञ्चालन के लिए राय बहादुर मधुसूदन दास ने स्थानीय नागरिकों की सहायता से विद्यालय प्रबंध समिति की स्थापना की और समिति ने उन्हें आजीवन अध्यक्ष पद पर प्रतिष्ठित रखा | दी महाबीर जुट मिल, सहजनवाँ-गोरखपुर के नियामक श्री पुरुषोत्तम मसकरा एवं जगदीश प्रसाद मसकरा भी कतिपय समय की लिए प्रबंध समिति के क्रमशः अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद को सुशोभित किये | क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक श्री लाल जी सिंह प्रबंध समिति के प्रबंध बनाये गए, जो आजीवन इस पद पर बने रहे |

उनकी मृत्यु के बाद उनके सुपुत्र श्री कृष्ण प्रताप सिंह ने उस पद को अलंकृत किया | 4 अगस्त 2011 को श्री कृष्ण प्रताप सिंह के दिवंगत हो जाने पर उनके पुत्र श्री सत्य प्रकाश सिंह प्रबंधक पद पर आसीन होकर कार्य कर रहे हैं | विद्यालय प्रबंधक समिति के अध्यक्ष पद को राय बहादुर मधुसूदन दास के दिवंगत हो जाने के बाद क्रमशः श्री बैजनाथ प्रसाद, श्री हनुमान प्रसाद सुरेका तथा कौड़ीराम क्षेत्र के विधायक स्व. ध्रुव नारायण सिंह ने विद्यालय को गति प्रदान की वर्तमान में श्री महेंद्र प्रताप शाही इस पद को सुशोभित कर रहे है | विद्यालय को इस बात का गर्व है की विद्यालय के इतिहास में आज तक प्रबंध समिति, प्रधानाचार्यों तथा शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बीच कभी भी किसी प्रकार का मनोमालिन्य नहीं आया, जो इस युग को विशेष उपलब्धि है |

विद्यालय की उत्कर्ष को चरम सीमा पर पहुंचाने वाले संस्थापक प्रधानाचार्य सव. राज मंगल चौबे जी की जितनी प्रशंसा की जाय, कम ही है | सन 1972 में चौबे जी की सेवा निवृति के बाद श्री गोपीचन्द सिंह जी कोऑपरेटिव इंटर कॉलेज पिपराइच से स्थानांतरित होकर इस विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर आसीन हुए | वे एक मजे मजाये ख्यातिलब्ध प्रधानाचार्य थे | वे विद्यालय की परम्पराओं और क्रिया कलापों से प्रभावित रहे तथा उन्हें उसी तरह आगे बढ़ाते रहे | 1974 में श्री शीतल प्रसाद मिश्र जी ने प्रधानाचार्य का पद संभाला | वे अनुशासनप्रिय तथा पठन-पाठन के प्रति संवेदनशील व्यक्ति थे | 1977 में उनके असामयिक निधन से विद्यालय को अपूरणीय क्षति हुयी | 1977 में श्री हरिबंश पांडेय जी को विद्यालय का प्रधानचार्य बनाया गया |1987 में राम परीखन सिंह विद्यालय के प्रधानचार्य बने उन्होंने एक वर्ष के अति अल्पकाल में विद्यालय की सेवा की | इसके बाद श्री सत्यवान सिंह जी का छः वर्ष का शानदार कार्यकाल रहा | इनके कार्यकाल में भवन निर्माण व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा खेल- कूद में विद्यालय के अनेक प्रतिभाओं ने प्रदेश स्तर पर विद्यालय को पहचान दिलायी | 1994 में श्री हरिशंकर मिश्र जी विद्यालय के प्रधानाचार्य बने | प्रधानाचार्य के रूप में एक वर्ष के अल्प सेवाकाल में आपने विद्यालय के स्वस्थ परम्पराओं को जीवन्त रखा | श्री हरिशंकर मिश्र जी अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृति तथा भोजपुरी भाषा पर समान अधिकार रखते थे | आपका व्यक्तित्व सरलता, विनम्रता तथा प्रशासनिक कठोरता का सुन्दर समन्वय था | श्री हरिशंकर मिश्र क्रिकेट के शानदार खिलाडी भी थे | तदोपरान्त श्री कृष्ण मुरारी मिश्र, श्री हृदय नारायण सिंह, श्री दीनानाथ पांडेय तथा श्री शारदा प्रसाद पांडेय जी प्रधानाचार्य के रूप में विद्यालय की यथोचित सेवा की | 2008 में डॉ. राजकरन प्रजापति भाषा के मर्मज्ञ तथा साहित्यिक अभिरुचि के व्यक्ति थे | आपके कार्यकाल में पत्रिकाओं, स्मारकों का प्रकाशन पुनः सुचारु रूप से होने लगा | स्काउट तथा खेल कूद के मंडल स्तर के अनेक आयोजन हुए | 1 अप्रैल 2022 से मेजर साकेत जी ने प्रधानाचार्य का पद संभाला है | प्रबंध-समिति के मार्गदर्शन से तथा योग्य, कर्मठ एवं उत्साही अध्यापको तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सहयोग से पठन-पाठन तथा पाठ्य सहगामी क्रिया कलापों में गुणात्मक सुधार के लिए पूरा विद्यालय परिवार प्रतिवद्ध है |